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20 सितंबर 1863 को लुडविग्सहाफेन में जन्मे, जूलियस एक्सटर एक व्यापारी परिवार से संबंध रखते थे। उनका पालन-पोषण एक ऐसे घरेलू वातावरण में हुआ जहाँ रचनात्मकता उनके रक्त में बसी थी; उनके भाई, ऑगस्ट एक्सटर ने भी अंततः एक वास्तुकार के रूप में अपना लक्ष्य प्राप्त किया। एक व्यावसायिक परिवार में मिली इस प्रारंभिक नींव ने एक ऐसे युवा व्यक्ति के लिए एक स्थिर पृष्ठभूमि प्रदान की, जिसका भाग्य दृश्य कलाओं की ओर मुड़ा हुआ था।
औपचारिक प्रशिक्षण की ओर उनका मार्ग मैनहेम से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा का आरंभ किया। हालाँकि, म्यूनिख की ओर उनके प्रस्थान ने ही उनके पेशेवर जीवन की दिशा तय की। 1881 में, जूलियस एक्सटर म्यूनिख की अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में नामांकित हुए, एक ऐसा निर्णय जिसने उन्हें बदलते हुए जर्मन कला परिदृश्य के केंद्र में ला खड़ा किया। इन्हीं शैक्षणिक दीवारों के भीतर, उन्होंने एक चित्रकार और मूर्तिकार दोनों के रूप में अपने दोहरे जुनून के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल को निखारना शुरू किया।
जूलियस एक्सटर का रचनात्मक विकास ऐतिहासिकता (historicism) की कठोर संरचनाओं से एक निरंतर विमुखता द्वारा चिह्नित था। वे रंगों के जीवंत और अभिव्यंजक उपयोग की ओर बढ़े, जिसने अंततः उनके परिपक्व काल को परिभाषित किया। इस संक्रमण ने उन्हें पारंपरिक शैक्षणिक बाधाओं से दूर और अभिव्यक्तिवाद (expressionism) की संवेदनशीलता की ओर अग्रसर किया। विभिन्न तकनीकों और पिगमेंट के साथ उनके प्रयोगों ने एक ऐसी दृश्य भाषा को जन्म दिया, जिसका Der Blaue Reiter समूह के साथ गहरा लगाव था।
अपने समकालीनों के बीच, पैलेट (रंगों के मिश्रण) को कुशलता से संचालित करने की अपनी अद्भुत क्षमता के कारण उन्होंने "रंगों के राजकुमार" जैसा उपनाम कमाया। उनका विषय मुख्य रूप से प्राकृतिक और मानवीय दुनिया के आवश्यक रूपों पर केंद्रित रहा, जिसे उन्होंने परिदृश्य (landscapes) और चित्रों (portraits) के माध्यम से जीवंत किया। उन्होंने अक्सर आकृति रचनाओं और नग्न आकृतियों (nudes) का भी अन्वेषण किया, जिसमें उन्होंने रंगों के अपने विकसित होते बोध को मानव रूप पर लागू किया। 1892 में स्थापित सेसेशन (Secession) आंदोलन में उनकी भागीदारी ने उन्हें म्यूनिख की इन बदलती सौंदर्यवादी धाराओं के केंद्र में स्थापित कर दिया।
म्यूनिख में ललित कला अकादमी में अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान, जूलियस एक्सटर को फ्रांज वॉन स्टुक के रूप में एक महत्वपूर्ण साथी मिला। इस मित्रता ने उनके शुरुआती जीवन की दिशा को आकार देने में मदद की, क्योंकि वे शहर के शैक्षणिक हलकों में अपनी पहचान बना रहे थे। जैसे-जैसे वे आगे बढ़े, उनका कलात्मक दायरा और भी विस्तृत होता गया, जब वे फ्रांज मार्क और 'डेर ब्लाउए राइटर' समूह से जुड़े। इस जुड़ाव ने उन्हें आधुनिकतावाद की उन बदलती धाराओं के साथ खड़ा कर दिया, जो जर्मन अभिव्यक्तिवाद को एक नई परिभाषा दे रही थीं।
वर्ष 1902 में, जूलियस एक्सटर ने अपनी रचनात्मक साधना के लिए एक भिन्न वातावरण की तलाश की और शिमसी (Chiemsee) में एक फार्महाउस खरीदा। यह स्थान केवल एक निजी विश्राम स्थल मात्र नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इस फार्म पर एक चित्रकला स्कूल की स्थापना की, जिसने पूरे यूरोप का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस क्षेत्र में उनकी उपस्थिति ने उन्हें कलाकारों का एक विशिष्ट समुदाय विकसित करने का अवसर दिया, जिससे एक ऐसा स्थान निर्मित हुआ जहाँ शहर की कठोर संरचनाओं से दूर तकनीक और रंगों के साथ नए प्रयोग किए जा सकें।
उनके शिक्षण का प्रभाव उन कई उल्लेखनीय छात्रों के माध्यम से महसूस किया गया, जिन्होंने आगे चलकर अपनी विशिष्ट कलात्मक पहचान बनाई। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वालों में मूर्तिकार इवा आइसेनलोहर और कार्ल फ्रेडरिक लिपमैन जैसे नाम शामिल थे। इन संबंधों ने यह सुनिश्चित किया कि रूप और संरचना के प्रति उनका अनूठा दृष्टिकोण उस युग के कला परिदृश्य में निरंतर प्रवाहित होता रहे।
जूलियस एक्सटर के जीवन के उत्तरार्ध का व्यक्तिगत परिदृश्य महत्वपूर्ण परिवर्तनों से भरा रहा। वर्ष 1898 में, उनका विवाह पियानोवादक और चित्रकार जूडिथ अन्ना कोहलर से हुआ, इस मिलन से दो बच्चों का जन्म हुआ जिन्होंने आगे चलकर कला के मार्ग को ही चुना। हालांकि, उनके जीवन का यह अध्याय 1917 में तब समाप्त हुआ जब इस दंपत्ति का तलाक हो गया। अंततः वे म्यूनिख लौट आए, फिर भी चिमसी (Chiemsee) क्षेत्र के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बना रहा।
1902 में, उन्होंने चिमसी के पास उबेरसी-फेल्डवीज़ (Übersee-Feldwies) में एक फार्महाउस खरीदा, जो उनके निजी निवास के साथ-साथ एक प्रसिद्ध चित्रकला स्कूल के रूप में भी जाना जाने लगा। यही वह स्थान था जहाँ उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए। 1939 में उबेरसी में अपने घर पर हृदय गति रुकने के कारण उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, उनकी बेटी जूडिथ ने उनके जीवन भर की संपत्ति को जीवन भर की वार्षिकी (annuity) के बदले में बवेरिया राज्य को दान करके इसे सुरक्षित करना सुनिश्चित किया।
आज, उबेरसी-फेल्डवीज़ में उनके द्वारा स्थापित वह घर एक संग्रहालय और गैलरी के रूप में कार्य करता है। उनकी रचनात्मक कृतियाँ विभिन्न संग्रहों के माध्यम से जनता के लिए सुलभ हैं, जिनमें हेरेंचीमसी (Herrenchiemsee) में ऑगस्टिनियन मठ के प्रेलसी विंग में प्रदर्शित कलाकृतियाँ भी शामिल हैं।
1863 - 1939 , जर्मनी