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Melancholy Atomic

द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी के लिए प्रसिद्ध अतियथार्थवाद के उस्ताद। आज ही उनकी स्वप्निल दुनिया में उतरें।

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संक्षिप्त विवरण

  • Medium: Oil on canvas
  • Artistic style: Symbolic Painting
  • Notable elements or techniques: Paranoid-Critical Method
  • Year: 1945
  • Location: Private Collection

Melancholy Atomic: A Descent into Surrealist Psyche

Salvador Dalí’s “Melancholy Atomic,” painted in 1945, isn't merely a visual spectacle; it’s an invitation to wander through the labyrinthine corridors of the subconscious. Executed during Dalí’s peak creative period—a time marked by intense experimentation and fueled by his signature Paranoid-Critical Method—the painting embodies the anxieties and uncertainties simmering beneath the surface of postwar Europe.

The scene unfolds in a desolate landscape dominated by muted tones, mirroring the pervasive mood of disillusionment following World War II. Two figures stand awkwardly positioned against this backdrop, their postures conveying a palpable sense of isolation. These individuals are not presented as characters in a conventional narrative but rather as conduits for exploring existential themes—a deliberate choice reflecting Dalí’s fascination with Freud and his desire to dissect the human psyche.

Stylistic Precision: The Paranoid-Critical Method

Dalí's meticulous attention to detail is immediately apparent. Every element within “Melancholy Atomic” contributes to a carefully constructed illusion, achieved through painstaking layering of paint—a hallmark of his Paranoid-Critical Method. This technique involved confronting one’s own anxieties and distortions of reality while simultaneously striving for objective representation. The resulting artwork possesses an unsettling beauty, capturing the paradoxical nature of perception.

  • Composition: The asymmetrical arrangement emphasizes disorientation and instability.
  • Color Palette: Dominated by earthy browns and grays, punctuated by splashes of crimson—a jarring contrast intended to provoke emotional response.
  • Texture: Thick impasto creates a tactile surface that reinforces the painting’s dreamlike quality.

Symbolic Resonance: Birds, Clocks, and the Weight of Time

“Melancholy Atomic” is replete with symbolic imagery—elements drawn from Dalí's personal mythology and infused with Freudian concepts. The prominent clocks represent the relentless march of time and the inevitability of decay, mirroring anxieties about mortality prevalent during the era. Scattered birds symbolize hope amidst despair, their fragile forms juxtaposed against the bleak landscape.

  • The bird in the upper middle section embodies resilience and aspiration—a beacon of optimism within a desolate setting.
  • The clocks serve as reminders of passing time and the futility of resisting change—themes central to Dalí’s exploration of psychological trauma.
  • Emotional Impact: A Portrait of Existential Angst

    Ultimately, “Melancholy Atomic” transcends mere visual representation; it communicates profound emotional depth. The painting captures the pervasive sense of melancholy and unease characteristic of the postwar period—a reflection of Dalí’s own internal struggles with loss and trauma. It compels viewers to confront uncomfortable truths about human existence and invites contemplation on the nature of consciousness.

    A reproduction of “Melancholy Atomic” can serve as a striking centerpiece for interior design projects, injecting an element of surrealism and intellectual curiosity into any space. Its evocative imagery and masterful technique resonate with collectors who appreciate Dalí’s uncompromising vision—a testament to his enduring legacy as one of the most influential artists of the 20th century.

    प्रश्न और उत्तर

    साल्वाडोर डाली द्वारा "Melancholy Atomic" के लिए किस प्रिंट आकार का सुझाव दिया गया है?

    साल्वाडोर डाली द्वारा "Melancholy Atomic" के लिए अनुशंसित प्रिंट आकार Large है।

    क्या "Melancholy Atomic" में प्रकाश और छाया का गहरा कंट्रास्ट (contrast) दिखाई देता है?

    साल्वाडोर डाली द्वारा "Melancholy Atomic" का कंट्रास्ट स्तर Balanced है।

    क्या मैं "Melancholy Atomic" को फुल-स्क्रीन स्लाइडशो के रूप में देख सकता हूँ?

    एक स्लाइडशो उपलब्ध है: साल्वाडोर डाली द्वारा "Melancholy Atomic" का स्लाइडशो पेज।


    कलाकार का जीवन परिचय

    साल्वाडोर डाली का प्रारंभिक जीवन

    स्पेन के फिग्यूरेस के धूप से सराबोर शहर में, साल्वाडोर डाली एक ऐसी दुनिया में आए जो पहले से ही गहरे नुकसान के अहसास से चिह्नित थी। उनके जन्म से नौ महीने पहले, साल्वाडोर नाम का ही एक बड़ा भाई गुजर चुका था। एक सख्त पिता और एक ममतामयी माँ की पृष्ठभूमि में हुए इस शुरुआती आघात ने एक ऐसे व्यक्तित्व को आकार दिया जो एक साथ तड़क-भड़क वाला और अत्यंत अंतर्मुखी था। उनके पिता, साल्वाडोर लुका राफेल एनिसेटो डाली कुसी, एक मध्यमवर्गीय वकील और नोटरी के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी माँ, फेलिपा डोमेनच फेरेस, एक अलग तरह का प्रभाव प्रदान करती थीं। उनका पालन-पोषण उनकी बहन, अन्ना मारिया के साथ हुआ।

    उनके भाई की छाया दशकों बाद उनके काम में फिर से उभर कर आई, जो द्वैत और प्रतिस्थापन का एक आवर्ती विषय बन गई। कैनवास की ओर उनका सफर मैड्रिड के सैन फर्नांडो अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में औपचारिक प्रशिक्षण के साथ शुरू हुआ। वहाँ, उन्होंने पुनर्जागरण के महान कलाकारों की परंपराओं और प्रभाववादियों के प्रकाश के बीच अपनी कला को विकसित किया। उनके पास एक ऐसी तकनीकी कुशलता थी जिसने उन्हें इतनी स्पष्टता के साथ पेंट करने की अनुमति दी कि सबसे विचलित करने वाले दृश्य भी वास्तविक महसूस होने लगे। उनके शुरुआती वर्ष इन प्रभावों का एक धीमा संचय थे, जो रूप को तोड़ने की कोशिश करने से पहले उसके सटीक चित्रण को सीखने का एक दौर था।

    मैड्रिड और पेरिस के रचनात्मक वर्ष

    मैड्रिड में सैन फर्नांडो अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में मिले औपचारिक प्रशिक्षण ने उनकी कला की नींव रखी। उन्होंने पुनर्जागरण के महान कलाकारों की परंपराओं और प्रभाववादियों के प्रकाश का गहन अध्ययन किया, लेकिन एक बेचैन कर देने वाली जिज्ञासा उन्हें ज्ञात सीमाओं के पार ले जाने के लिए व्याकुल थी। 1926 तक, वे पेरिस चले गए। वह शहर एक सांस्कृतिक भूकंप की तरह था, और वे स्वयं को उसके केंद्र में पाते हैं। वे दादावाद (Dadaism) की विद्रोही भावना की ओर आकर्षित हुए, जहाँ तर्क के त्याग और विसंगति को अपनाने के उनके स्वभाव ने उनके भीतर एक गहरी गूँज पैदा की।

    पेरिस का वातावरण 'अवंत-गार्द' की ऊर्जा से सराबोर था। उन्होंने केवल स्टूडियो और कैफे में हो रहे परिवर्तनों को देखा ही नहीं; बल्कि वे उस वैचारिक संघर्ष का एक अभिन्न हिस्सा बन गए। 1929 में, उन्होंने अतियथार्थवादी (Surrealist) समूह में प्रवेश किया। यह कदम उनके पिछले अध्ययनों से एक पूर्ण विचलन था, क्योंकि यहीं से उन्होंने अपनी प्रसिद्ध "पैरानोइक-क्रिटिकल पद्धति" विकसित करना शुरू किया। यह अवचेतन मन की अतार्किकता तक पहुँचने का एक अनूठा तरीका था, जिसमें नियंत्रित उन्माद की स्थिति पैदा करके मन की आंतरिक अराजकता को ऐसी स्पष्टता के साथ चित्रित किया जा सकता था, जो किसी फोटोग्राफ जैसी जीवंत और वास्तविक प्रतीत होती थी।

    एक अनूठी तकनीक का विकास

    साल्वाडोर डाली का कार्य एक ऐसी सटीकता के साथ किया गया था जो लगभग नैदानिक (clinical) प्रतीत होती थी। उनके हाथ अवचेतन मन की अतार्किकता को एक फोटोग्राफ जैसी स्पष्टता के साथ उकेरते थे, जिससे असंभव भी मूर्त और वास्तविक लगने लगता था। यह केवल नकल करने का मामला नहीं था, बल्कि एक सुविचारित प्रक्रिया थी जिसे उन्होंने "पैरानोइक-क्रिटिकल पद्धति" का नाम दिया। इस तकनीक के माध्यम से, उन्होंने नियंत्रित उन्माद (delirium) की स्थिति पैदा करके अतार्किक ज्ञान तक पहुँचने का प्रयास किया। उन्होंने इस पद्धति का उपयोग मानव मानस की खंडित और अक्सर विचलित कर देने वाली छवियों को अति-यथार्थवादी रूपों में अनुवादित करने के लिए किया। इसका परिणाम एक ऐसी दृश्य भाषा के रूप में सामने आया जहाँ जागृत दुनिया और स्वप्नलोक के बीच की सीमाएँ पूरी तरह से मिट गईं।

    उनके कैनवास विचलित कर देने वाले विरोधाभासों पर आधारित थे। उन्होंने वस्तुओं को ऐसे संदर्भों में रखा जहाँ उनका कोई अस्तित्व नहीं था, जिससे दर्शक की आँखें परिचित और विचित्र के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए मजबूर हो जाती थीं। एक परिदृश्य में पिघलती हुई घड़ी या एक लंबी, पतली टांग दिखाई दे सकती थी, जो एक ऐसा तनाव पैदा करती थी जो गहरा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ आश्चर्यजनक रूप से सार्वभौमिक भी था। उन्होंने क्षय की बनावट और समय की तरलता पर ध्यान केंद्रित किया, और अपनी तकनीकी कुशलता का उपयोग उन चीजों को वजन और पदार्थ देने के लिए किया जिनका कोई निश्चित आकार नहीं होना चाहिए था। उनके काम में परछाइयाँ केवल गिरती नहीं हैं; वे एक विशिष्ट और भारी इरादे के साथ खिंचती हैं।

    अतियथार्थवाद की प्रतिष्ठित उत्कृष्ट कृतियाँ

    अगस्त 1931 में, अवचेतन मन का परिदृश्य द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी के रूप में एक भौतिक रूप में ढल गया। यहाँ, समय अपनी कठोर संरचना खो देता है, और इसके बजाय कुछ नरम और पिघलते हुए रूप में दिखाई देता है। इसकी कल्पना असंभव का एक सटीक, लगभग फोटोग्राफिक चित्रण है, जहाँ वे वस्तुएँ जो कठोर और अडिग होनी चाहिए, एक तरल अवस्था के सामने घुटने टेक देती हैं। अतार्किक को मूर्त रूप देने की इस क्षमता ने उनके दृष्टिकोण की एक पहचान बना ली, जिसने एक सपने के क्षणभंगुर विकृतियों को कुछ ऐसा बना दिया जो भारी और वास्तविक महसूस होता है।

    उनका कार्य अक्सर स्मारकीयता की ओर बढ़ता था, जैसे कि द हैलुसिनेजेनिक टोरेडोर। यह विशाल कृति पैमाने और गति की एक ऐसी भावना को कैद करती है जो दर्शक के दृष्टिकोण को बदल देती है। यह एक ऐसी रचना है जो एक निश्चित वजन के साथ स्थान घेरती है, और एक स्वप्निल परिदृश्य को जीवंत करने के लिए उनके विशिष्ट प्रतीकों का उपयोग करती है। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न चरणों में इस दृश्य भाषा को परिष्कृत करना जारी रखा, भले ही उनकी रुचियाँ विज्ञान और विश्वास के मिलन बिंदु की ओर स्थानांतरित हो गईं।

    1955 तक, उनका ध्यान द सैक्रामेंट ऑफ द लास्ट सपर की ओर बढ़ गया था, एक ऐसी कृति जो पारंपरिक धार्मिक विषयों को पिघलती घड़ियों और विकृत आकृतियों जैसे अतियथार्थवादी तत्वों के साथ मिश्रित करती है। इस अवधि ने उनके तकनीकी कौशल का एक अलग पहलू दिखाया, जहाँ उन्होंने दैवीय विषयों पर सूक्ष्म रेखांकन का प्रयोग किया। बाद में, 1958 और 1959 के बीच, उन्होंने द डिस्कवरी ऑफ अमेरिका बाय क्रिस्टोफर कोलंबस का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विषयों का पता लगाने के लिए अपनी विशिष्ट, विस्तृत शैली का उपयोग जारी रखा।

    • द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी (1931)
    • द हैलुसिनेजेनिक टोरेडोर
    • द सैक्रामेंट ऑफ द लास्ट सपर (1955)
    • द डिस्कवरी ऑफ अमेरिका बाय क्रिस्टोफर कोलंबस (1958-1959)

    उनकी कला पर गाला का प्रभाव

    1894 में एलीना इवानोव्ना डियाकोनोवा के रूप में जन्मी गाला, साल्वाडोर डाली के उस जीवन में एक स्थिर उपस्थिति थीं, जो अक्सर एक प्रदर्शन की तरह जिया जाता था। वह केवल एक साथी नहीं थीं; वह उनकी प्रेरणा (म्यूज) थीं और उनके करियर के व्यावसायिक पक्ष का प्रबंधन भी करती थीं। उनका संबंध अत्यंत गहरा और व्यवस्थित था, जिसका परिणाम 1934 में उनके नागरिक विवाह के रूप में निकला। जहाँ एक ओर डाली अवचेतन मन की अतार्किकता पर ध्यान केंद्रित करते थे, वहीं गाला ने वह व्यावहारिक आधार प्रदान किया जिसने उनके काम को व्यापक दर्शकों तक पहुँचने में मदद की। वह उनकी रचनात्मक प्रवृत्तियों के लिए एक एजेंट के रूप में कार्य करते हुए, उनके ध्यान को सही दिशा देने वाली शक्ति बनी रहीं।

    गाला का चेहरा और उनकी उपस्थिति डाली के कैनवासों पर बार-बार दिखाई देती है, जहाँ उन्हें अक्सर धार्मिक या मातृत्व के महत्वपूर्ण रूपों में चित्रित किया गया है। The Madonna of Port Lligat में, उन्हें एक विशिष्ट और शांत गंभीरता के साथ उकेरा गया है। वह एक निरंतर विषय बनी रहीं, जिनकी छवि का उपयोग इच्छा और पहचान जैसे विषयों को तलाशने के लिए किया गया। उनका यह बंधन डाली के सबसे उत्पादक वर्षों का संरचनात्मक केंद्र था, जिसने उनके विचित्र सार्वजनिक व्यवहारों के बीच स्थिरता का अहसास कराया। वह एक सहयोगात्मक शक्ति थीं, क्योंकि उनकी उपस्थिति डाली की दृश्य भाषा के ताने-बाने में गहराई से बुनी हुई थी।

    • The Madonna of Port Lligat
    • Imperial Monument to the Child-Woman, Gala (1929)
    • Memory of the Child-Woman (1932)
    • The Angelus of Gala (1935)
    • Gala and "The Angelus" of Millet before the Imminent Arrival of the Conical Anamorphoses (1933)
    • William Tell and Gradiva (1931)

    परमाणु रहस्यवाद की ओर संक्रमण

    जब 1948 में वे स्पेन लौटे, तो उनके काम का केंद्र बदलने लगा। अवचेतन मन की वे शुरुआती और अराजक खोजें अब एक ऐसे दौर के लिए रास्ता छोड़ रही थीं जिसे उन्होंने "परमाणु रहस्यवाद" (nuclear mysticism) का नाम दिया। यह वह समय था जब आधुनिक विज्ञान की खोजों के प्रति उनका आकर्षण, कैथोलिक विश्वास में एक गहरे और नए उत्साह से मिल रहा था। उन्होंने परमाणु की अदृश्य शक्तियों और धार्मिक परंपरा के आध्यात्मिक भार के बीच सामंजस्य बिठाने का एक मार्ग खोजने का प्रयास किया।

    उनका हाथ पहले की तरह ही सटीक बना रहा। उन्होंने इन नए और पवित्र विषयों पर एक सूक्ष्म और विस्तृत रेखांकन का प्रयोग किया, जिससे धार्मिक विषयों का चित्रण इतनी स्पष्टता के साथ हुआ जो लगभग नैदानिक (clinical) प्रतीत होता था। उनके ब्रश के स्ट्रोक्स में कोई कोमलता नहीं आई; बल्कि, वे भौतिक और दैवीय के मिलन बिंदु को चित्रित करने का एक उपकरण बन गए। उन्होंने इस तकनीकी अनुशासन का उपयोग भौतिक ब्रह्मांड की बदलती समझ से आकार लिए हुए एक ऐसे लेंस के माध्यम से विश्वास के रहस्यों को टटोलने के लिए किया।

    The Sacrament of the Last Supper (1955), Christ of Saint John of the Cross (1951), The Ascension of Christ (1958)

    अंतिम वर्ष और मृत्यु

    साल्वाडोर डाली के जीवन के अंतिम वर्ष स्पेन के फिग्यूरेस में बीते। वे 1984 से लेकर 1989 में अपनी मृत्यु तक वहीं रहे। उनका जन्मस्थान उनके संसार का केंद्र बना रहा, एक ऐसा स्थान जहाँ उनके निजी जीवन और सार्वजनिक व्यक्तित्व के बीच की सीमाएँ बहुत पहले ही मिट चुकी थीं। उन्होंने इसी शहर में डाली थिएटर-म्यूजियम का डिज़ाइन तैयार किया था, जो एक विशाल अतियथार्थवादी वस्तु के रूप में कार्य करता है, जिसमें वह पुराना थिएटर भी शामिल है जहाँ उन्होंने एक युवा कलाकार के रूप में अपनी कला प्रदर्शित की थी।

    23 जनवरी, 1989 को उनके जीवन का अंत हुआ। उन्हें डाली थिएटर-म्यूजियम के मंच के नीचे स्थित एक क्रिप्ट में दफनाया गया है। यह विश्राम स्थल उसी संरचना के नीचे स्थित है जिसे बदलने में उन्होंने मदद की थी, उस भूलभुलैया जैसे स्थान के भीतर एक अंतिम स्थान जिसे उन्होंने स्वयं रचने में योगदान दिया था। यह संग्रहालय उनके इतिहास का एक भौतिक हिस्सा बना हुआ है, जिसमें उनकी अंतिम कृतियाँ सुरक्षित हैं, जिनमें 1983 की एक पेंटिंग द स्वेलो'स टेल भी शामिल है।

    उनके कार्यों की स्थायी विरासत

    साल्वाडोर डाली द्वारा निर्मित छवियां केवल कैनवास तक ही सीमित नहीं रहीं। वे दैनिक जीवन की सीमाओं से बाहर निकलकर फैशन, विज्ञापन और लोकप्रिय संस्कृति की व्यापक धाराओं में समाहित हो गईं। इस व्यापक पहुंच ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी दृश्य भाषा दीर्घाओं से परे जाकर सामूहिक स्मृति का एक अभिन्न हिस्सा बन जाए। बीसवीं सदी के 'अवांत-गार्द' (avant-garde) आंदोलन में उनकी उपस्थिति ने इस बात को आकार देने में मदद की कि दुनिया अतार्किक और विचित्र चीजों को किस नज़रिए से देखती है।

    उनका प्रभाव रचनाकारों की अगली पीढ़ी तक फैला हुआ है। जिस तरह से उन्होंने प्रतीकों और वास्तविकता के साथ हेरफेर किया, उसने पॉप आर्ट और जेफ कून्स और डेमियन हर्स्ट जैसे समकालीन कलाकारों के कार्यों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने एक ऐसा खाका तैयार किया कि कैसे एक कलाकार अपने स्वयं के व्यक्तित्व और अपने विशिष्ट, विचलित कर देने वाले प्रतीकों का उपयोग करके उच्च कला और आम जनता के बीच की खाई को पाट सकता है। अन्य अतियथार्थवादियों ने भी उनके द्वारा बनाए गए रास्तों से प्रेरणा ली, और उनके द्वारा विकसित की गई पद्धतियों के माध्यम से अवचेतन मन की गहराइयों को समझने के नए तरीके खोजे।

    • द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी
    • द सैक्रामेंट ऑफ द लास्ट सपर
    • द डिसइंटीग्रेशन ऑफ पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी
    • द हैलुसिनेटोजेनिक टोरेडोर

    आज उनकी कृतियों को कहाँ देखें

    साल्वाडोर डाली के पदचिह्नों को खोजने के लिए, कोई भी स्पेन के फिग्यूरेस में स्थित डाली थिएटर-म्यूजियम से अपनी यात्रा शुरू कर सकता है। यह इमारत स्वयं में एक भूलभुलैया जैसी संरचना है, जिसे उस पुराने शहर के थिएटर के चारों ओर बनाया गया है जहाँ उन्होंने एक युवा कलाकार के रूप में अपनी कला प्रदर्शित की थी। उन्हें मंच के नीचे एक क्रिप्ट में दफनाया गया है। इस स्थान में आभूषणों के संग्रह सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुएं मौजूद हैं, और एक ऐसा कमरा भी है जो दृष्टिभ्रम (optical illusions) और विरूपित कला (anamorphic art) से भरा हुआ है। 1938 की एक कृति से प्रेरित एक विशाल कार इस स्थान के केंद्र के पास खड़ी दिखाई देती है।

    संयुक्त राज्य अमेरिका में, फ्लोरिडा के सेंट पीटर्सबर्ग में स्थित साल्वाडोर डाली संग्रहालय उनकी कलाकृतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संजोए हुए है। स्थानीय मौसम की मार झेलने के लिए इस संग्रहालय को अठारह इंच मोटी कंक्रीट की दीवारों के साथ बनाया गया है। इसकी वास्तुकला में एक विशाल कांच का प्रवेश द्वार और "द एनिग्मा" के रूप में जाना जाने वाला एक जियोडेसिक गुंबद शामिल है। इस संग्रह में द डिसइंटीग्रेशन ऑफ पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी जैसी विशालकाय पेंटिंग शामिल हैं। इन दीवारों के भीतर आगंतुक उनकी मूर्तियां और विभिन्न कलात्मक वस्तुएं भी देख सकते हैं।

    अन्य संग्रह उनकी कल्पनाओं से रूबरू होने का एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं। ओहियो के क्लीवलैंड में स्थित रेनॉल्ड्स मोर्स फाउंडेशन उनके कार्यों का एक व्यापक संग्रह बनाए रखता है। वहीं, वेनिस के एक पैलेज़ो में स्थित सोलोमन आर. गुगेनहाइम वेनिस के पास भी उनकी पेंटिंग मौजूद हैं। ये स्थान उनकी तकनीकी चित्रकला की बारीकियों और चींटियों या पिघलती घड़ियों जैसे प्रतीकों के उनके अनूठे उपयोग को करीब से देखने का अवसर देते हैं।

    • द डिसइंटीग्रेशन ऑफ पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी
    • द हैलुसिनेजेनिक टोरेडोर
    • द सैक्रामेंट ऑफ द लास्ट सपर
    • पोर्ट्रेट ऑफ माय डेड ब्रदर
    • द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी
    साल्वाडोर डाली

    साल्वाडोर डाली

    1904 - 1989 , स्पेन

    संक्षिप्त जानकारी

    • Artistic Movement Or Style: अतियथार्थवाद (Surrealism)
    • Artists Or Movements Influenced By This Artist:
      • पॉप आर्ट
      • समकालीन कलाकार
    • Artists Who Influenced This Artist:
      • घनवाद (Cubism)
      • दादावाद (Dada)
      • पाब्लो पिकासो
    • Date Of Birth: 1904
    • Date Of Death: 1989
    • Full Name: साल्वाडोर डोमिंगो फेलिपे जैकिनटो डाली आई डोमेनच
    • Nationality: स्पेनिश
    • Notable Artworks:
      • द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी
      • जूलियट का मकबरा
      • मैनकिन
      • मक्खियों के साथ परिदृश्य
      • गाला का एंजेलस
    • Place Of Birth: फिगेरेस, स्पेन