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Writing Table

हेनरी रीसेनर के मंत्रमुग्ध कर देने वाले नेपोलियनकालीन चित्रों और प्रसिद्ध लघु चित्रों को देखें। फ्रांसीसी कलाकार जो अपनी परिष्कृत शैली और लूव्र में स्थित प्रतिष्ठित कृतियों के लिए जाने जाते हैं।

गिक्ली / आर्ट प्रिंट

तेज़ उत्पादन और विभिन्न फिनिश विकल्पों के साथ म्यूजियम-क्वालिटी गिकली (giclée) या कैनवस प्रिंट। (हाथ से बनी पेंटिंग खरीदें हाथ से बनी पेंटिंग खरीदेंडिजिटल इमेज पर स्विच करें डिजिटल इमेज पर स्विच करें)

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थोक छूट का लाभ

कुल कीमत

$ 68

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Writing Table

गिक्ली / आर्ट प्रिंट

प्रतिकृति का आकार

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कुल देय राशि

$ 68

Small, luxurious writing tables such as this were usually found in the private apartments of an aristocratic residence or chateau, often in a lady’s bedroom for her correspondence and reading as they do not offer much space to spread books and documents. This table lacks both the customary drawer for storing paper and the standard fitted écritoire, or writing compartment, to keep the ink and quills. It is therefore possible that it was designed to be used in a study, probably by a man, who would have also owned a large matching bureau plat (now lost) with ample drawer space and the necessary writing accessories.Source: Vignon, Charlotte. The Frick Collection Decorative Arts Handbook. New York: The Frick Collection/Scala, 2015.

कलाकार का जीवन परिचय

जॉन ग्लोवर: अंग्रेजी प्रकाश के चित्रकार

1767 में लेस्टरशायर के हॉटन-ऑन-द-हिल में जन्मे, जॉन ग्लोवर का जीवन और करियर दो बिल्कुल अलग परिदृश्यों में विकसित हुआ – लंदन की हलचल भरी शहरी दुनिया और वान डिमेन लैंड (बाद में तस्मानिया) की उभरती हुई ग्रामीण सुंदरता। शुरुआत में एक ड्राइंग मास्टर के रूप में प्रशिक्षित, ग्लोवर की कलात्मक प्रतिभा जल्द ही उनकी प्रारंभिक महत्वाकांक्षाओं से कहीं आगे निकल गई। वे चित्रकला की ओर मुड़े और खुद को ब्रिटिश और अंततः ऑस्ट्रेलियाई कला जगत के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूपता स्थापित किया। उन्हें अक्सर "द इंग्लिश क्लाउड" कहा जाता था, और ग्लोवर की विरासत प्रकाश और वातावरण के उनके उत्कृष्ट चित्रण पर टिकी है, विशेष रूप से परिदृश्य चित्रों (landscapes) में – एक ऐसी शैली जिसने आने वाली कलाकारों की पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया।

ग्लोवर का प्रारंभिक करियर लंदन की जड़ों से मजबूती से जुड़ा था। वे 'ओल्ड वॉटर कलर सोसाइटी' के सदस्य बने, जो परिदृश्य चित्रकला के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित समूह था, और बाद में इसके अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। इस अवधि के दौरान उनका काम काफी हद तक "इटालो-इंग्लिश" शैली की ओर झुका हुआ था, जिसकी विशेषता इतालवी दृश्यों का आदर्श चित्रण था – जैसे लहरदार पहाड़ियाँ, सरू के पेड़ और धूप से सराबोर विला – जो ब्रिटिश संरक्षकों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। ये पेंटिंग्स केवल प्रतिकृतियां नहीं थीं; ग्लोवर ने उनमें रोमांस और नाटकीयता का संचार किया, और शांति एवं भव्यता की भावना जगाने के लिए वायुमंडलीय परिप्रेक्ष्य (atmospheric perspective) और सावधानीपूर्वक सोची गई रचनाओं का उपयोग किया। वे प्रकाश के क्षणभंगुर प्रभावों को पकड़ने में विशेष रूप से निपुण थे, जिसके कारण उन्हें प्रसिद्ध फ्रांसीसी परिदृश्य चित्रकार क्लाउड लॉरेन के समान "द इंग्लिश क्लाउड" की उपाधि मिली, जो प्रकृति के प्रकाशमय और नाटकीय चित्रण के लिए जाने जाते थे।

  • प्रमुख प्रभाव: ग्लोवर का कलात्मक विकास कई प्रमुख प्रभावों से आकार ले चुका था। क्लाउड लॉरेन के कार्यों ने वायुमंडलीय परिप्रेक्ष्य और नाटकीय प्रकाश व्यवस्था की एक आधारभूत समझ प्रदान की। उन्होंने डच उस्तादों (Dutch Masters) से भी प्रेरणा ली, विशेष रूप से गहराई और यथार्थवाद पैदा करने के लिए उनके रंग और ब्रशवर्क के उपयोग से।
  • तकनीक: ग्लोवर की तकनीक उनके पूरे करियर में महत्वपूर्ण रूप से विकसित हुई। प्रारंभ में, वे एक अधिक विस्तृत, लगभग शैक्षणिक शैली को पसंद करते थे, जिसमें हर पत्ते और पत्थर को बारीकी से उकेरा जाता था। हालाँकि, जैसे ही वे वान डिमेन लैंड चले गए, उनका दृष्टिकोण अधिक मुक्त और अभिव्यंजक हो गया, जहाँ उन्होंने सटीक विवरण के बजाय प्रकाश और वातावरण के सार को पकड़ने को प्राथमिकता दी।

ग्रामीण अग्रदूत: वान डिमेन लैंड में जीवन

1835 में, ग्लोवर ने वान डिमेन लैंड (अब तस्मानिया) की एक परिवर्तनकारी यात्रा शुरू की, जो उस समय तेजी से विस्तार कर रही एक सीमावर्ती कॉलोनी थी। इस कदम ने उनके कलात्मक करियर में एक निर्णायक मोड़ का काम किया और "ऑस्ट्रेलियाई परिदृश्य चित्रकला के पिता" के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को पुख्ता किया। इंग्लैंड के परिष्कृत परिदृश्यों के अभ्यस्त कलाकार के लिए, यहाँ का बिल्कुल अलग वातावरण – विशाल खुले मैदान, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ और नीलगिरी के जंगल – चुनौतियों और अवसरों का एक नया समूह लेकर आया।

प्रारंभ में, ग्लोवर को स्थापित औपनिवेशिक कलाकारों के बीच स्वीकृति पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। हालाँकि, तस्मानिया के जंगलों के प्रकाश और वातावरण को पकड़ने की उनकी अनूठी क्षमता ने धीरे-धीरे पहचान बना ली। उन्होंने ग्रामीण जीवन के दृश्यों – भेड़ फार्मों, स्थानीय बस्तियों और नाटकीय तटीय परिदृश्यों – को विवरणों की पैनी दृष्टि और स्थानीय पर्यावरण की समझ के साथ चित्रित करना शुरू किया। उनकी पेंटिंग्स ने औपनिवच्छिक ऑस्ट्रेलिया का एक रूमानी लेकिन प्रामाणिक चित्रण पेश किया, जिसमें इसकी सुंदरता और इसकी कठिनाइयों दोनों को कैद किया गया था।

  • विषय वस्तु: ग्लोवर के तस्मानियाई कार्य उनके शुरुआती इतालवी परिदृश्यों से नाटकीय रूप से भिन्न थे। उन्होंने स्थानीय जीवन, ग्रामीण बस्तियों और ऊबड़-खाबड़ तटरेखा के दृश्यों को चित्रित किया – ऐसे विषय जो औपनिवेशिक अस्तित्व की वास्तविकताओं को दर्शाते थे।
  • शैली का विकास: तस्मानिया में उनकी शैली अधिक मुक्त और अभिव्यंजक हो गई, जो परिदृश्य की विशालता और नाटकीयता को दर्शाती थी। उन्होंने गति और वातावरण को व्यक्त करने के लिए 'ब्रोकन ब्रशस्ट्रोक' तकनीक का उपयोग किया, जिससे उन्होंने असाधारण कौशल के साथ तस्मानिया के जंगलीपन के सार को पकड़ा।

ग्लोवर के परिदृश्यों में प्रतीकवाद और कथा

प्रकृति के दृश्यों को केवल चित्रित करने से परे, ग्लोवर की पेंटिंग्स प्रतीकवाद और कथाओं से समृद्ध हैं। उनके परिदृश्य केवल सुंदर दृश्य नहीं हैं; वे सावधानीपूर्वक निर्मित रचनाएँ हैं जो मानवीय अनुभव, मानवता और प्रकृति के बीच संबंध, और समय के बीतने के बारे में गहरे अर्थ व्यक्त करती हैं। उन्होंने अक्सर अपने दृश्यों में शास्त्रीय रूपांकनों – खंडहरों, मूर्तियों और पौराणिक आकृतियों – को शामिल किया, जिससे प्राचीन परंपराओं का सूक्ष्म संदर्भ मिलता है और बौद्धिक गहराई की परतें जुड़ती हैं।

इस संबंध में प्रकाश का ग्लोवर का उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाटकीयता और वातावरण की भावना पैदा करने के लिए 'कियारोस्क्यूरो' (chiaroscuro)—प्रकाश और छाया के बीच नाटकीय अंतर—का कुशलतापूर्वक उपयोग किया। प्रकाश केवल दृश्य को रोशन नहीं कर रहा है; यह सक्रिय रूप से कथा को आकार दे रहा है, दर्शक की दृष्टि का मार्गदर्शन कर रहा है और विशिष्ट भावनाओं को जगा रहा है। उदाहरण के लिए, "कांगारू पॉइंट से माउंट वेलिंगटन और होबार्ट टाउन" जैसी पेंटिंग्स में, भोर की सुनहरी रोशनी परिदृश्य को एक अलौकिक चमक से सराबोर कर देती है, जिससे शांति और सुंदरता का अहसास होता है।

प्रमुख प्रतीकात्मक तत्व:
  • खंडहर: अक्सर समय के बीतने और सभ्यताओं के पतन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • मूर्तियाँ: अक्सर शास्त्रीय पौराणिक कथाओं और रूपक विषयों को याद दिलाती हैं।
  • पेड़ और पत्तियाँ: दृश्यों को फ्रेम करने, गहराई पैदा करने और प्रकृति के विभिन्न पहलुओं – विकास, क्षय और पुनरुद्धार – का प्रतीक बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

विरासत और ऐतिहासिक महत्व

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों में परिदृश्य चित्रकला के विकास पर जॉन ग्लोवर का प्रभाव निर्विवाद है। तस्मानिया में उनके अग्रणी कार्य ने ऑस्ट्रेलियाई परिदृश्य कला की एक नई परंपरा स्थापित की, जिसने कलाकारों की पीढ़ियों को महाद्वीप के जंगलीपन की सुंदरता और नाटकीयता को पकड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि परिदृश्य केवल एक सुंदर चित्र से कहीं अधिक हो सकता है; यह जटिल विषयों और विचारों की खोज का एक माध्यम हो सकता है।

जीन हेनरी रीसेनर

जीन हेनरी रीसेनर

1767 - 1828 , जर्मनी

मुख्य तथ्य

  • Artistic Movement Or Style: क्लॉडियन परिदृश्य
  • Artists Or Movements Influenced By This Artist: ['प्रभाववादी']
  • Artists Who Influenced This Artist: ['क्लॉड लोरैन']
  • Date Of Birth: 18 फरवरी 1767
  • Date Of Death: 9 दिसंबर 1849
  • Full Name: जॉन ग्लोवर
  • Nationality: ब्रिटिश
  • Notable Artworks:
    • माउंट वेलिंगटन...
    • ऊज़ पर मूल निवासी...
    • उनके घर का एक दृश्य
  • Place Of Birth: हौटन-ऑन-द-हिल, लेस्टरशायर