पूर्वावलोकन देखें AR में देखें हाथ से बनी पेंटिंग खरीदें डिजिटल इमेज पर स्विच करें साझा करें
विस्तृत विवरण मार्गदर्शिका पसंदीदा में जोड़ें डाउनलोड करें समान कलाकृतियाँ एक्स-रे स्लाइड शो देखें आंकड़े

Reawakening

गुलियो अरिस्टाइड सार्टोरियो (1860-1932) एक इतालवी सिम्बोलिस्ट चित्रकार और फिल्म निर्देशक थे, जो सजावटी फ्रिज़, 'डायना ऑफ एपेश' जैसे पौराणिक दृश्यों और डैनुनज़ियो के साथ सहयोग के लिए जाने जाते हैं।

गिक्ली / आर्ट प्रिंट

तेज़ उत्पादन और विभिन्न फिनिश विकल्पों के साथ म्यूजियम-क्वालिटी गिकली (giclée) या कैनवस प्रिंट। ( हाथ से बनी पेंटिंग खरीदें डिजिटल इमेज पर स्विच करें)

मानक
कस्टम
CM
INCH

कलाकृति के मूल अनुपात से मेल खाने वाले हमारे पूर्व निर्धारित आकारों में से चुनें।

चौड़ाई
ऊँचाई

आप किसी विशिष्ट फ्रेम या स्थान के अनुसार अपने स्वयं के आयाम (dimensions) दर्ज कर सकते हैं। यदि आपके द्वारा चुना गया आकार मूल छवि के अनुपात से मेल नहीं खाता है, तो हम कलाकृति को क्रॉप कर देंगे या मिरर किए गए या सॉलिड-फिल किनारे के साथ छवि का विस्तार करेंगे। उत्पादन शुरू होने से पहले आपकी स्वीकृति के लिए एक डिजिटल मॉकअप भेजा जाएगा।
कृपया ध्यान दें कि स्क्रीन पर दिखने वाला प्रीव्यू वास्तविक क्रॉपिंग या विस्तार को नहीं दर्शाता है। केवल मॉकअप ही अंतिम संरचना को सटीक रूप से दिखाएगा।
हालाँकि कस्टम आकार उपलब्ध हैं, फिर भी हम मूल अनुपात बनाए रखने के लिए पूर्व-निर्धारित सूची में से एक आयाम चुनने की सलाह देते हैं।

विश्वव्यापी डिलीवरी (), मानक 4/5 सप्ताह के बजाय मात्र 2 सप्ताह में। (25 सितमबर)

why_choose_icon
दुनिया भर में मुफ़्त एक्सप्रेस शिपिंग
why_choose_icon
उच्च गुणवत्ता वाला लिनेन कैनवास
why_choose_icon
पूर्ण शिपिंग बीमा
why_choose_icon
सीमा शुल्क और आयात कर वापसी की गारंटी
why_choose_icon
सटीक रंग मिलान की गारंटी
why_choose_icon
100-दिन की वापसी नीति (केवल दोषपूर्ण होने पर)
why_choose_icon
100% पैसे वापसी की गारंटी
why_choose_icon
थोक छूट का लाभ

कुल कीमत

$ 68

reproduction

Reawakening

गिक्ली / आर्ट प्रिंट

प्रतिकृति का आकार

-

कुल देय राशि

$ 68

Reawakening and Rite are the artist’s own reworkings of two panels making up one of the decorative friezes produced between 1903 and 1912, in a period marked by great success in the exhibition field. There are in fact various instances of works that for some reason returned to the studio after the end of exhibitions – the 5th Esposizione Internazionale d’Arte di Venezia (Venice, 1903), the Saint Louis Wold’s Fair (1904), the Esposizione Nazionale di Belle Arti di Milano (Milan, 1906) and the Fine Art Society (London, 1908) – being subjected to either complete or partial revision. In some cases, this also regarded the dismantling of decorative works, such as the panels of the Casa del Popolo in Rome (1906) and parts of the frieze for Palazzo Montecitorio (1908–1912), the home of the Italian parliament. In 1923, as indicated on the front, Sartorio reworked the two canvases and made changes to the content of the scenes in order to celebrate Italy’s participation in World War I. The date of the declaration of war on Austria, 24 May 1915, was added to Reawakening and Rite was transformed into a celebration of the victory of 4 November 1918, by adding the date and the names of the places where the crucial battles were fought (the Carso, the Piave and Vittorio Veneto). Painted with the aid of photographic images similar to those by Eadweard Muybridge, the draped nudes convey a strong sense of movement and appear very similar to the parliament frieze in stylistic and compositional terms. Sartorio was thinking at the time of the Elgin Marbles from the Parthenon, which he had seen at the British Museum in 1893, and the works of the Pre-Raphaelites Dante Gabriele Rossetti and Edward Burne-Jones, his primary points of artistic and intellectual reference along with Nino Costa and Gabriele D’Annunzio.

कलाकार का जीवन परिचय

वॉल्टर रिचर्ड सिकर्ट: लंदन के आधुनिकतावादी परिदृश्य की एक रहस्यमयी आकृति

1860 में जर्मनी में जन्मे और 1942 में इंग्लैंड में दुखद मृत्यु को प्राप्त वॉल्टर रिचर्ड सिकर्ट, ब्रिटिश कला के इतिहास में एक अत्यंत सम्मोहक और रहस्यमयी व्यक्तित्व बने हुए हैं। वे केवल एक कलाकार ही नहीं थे, बल्कि शहरी जीवन के एक सूक्ष्म दृष्टा, चेहरों के संग्राहक और लंदन में आधुनिक चित्रकला के विकास पर एक महत्वपूर्ण, हालांकि अक्सर गलत समझे जाने वाले, प्रभावक भी थे। उनका करियर दशकों तक चला, जिसमें उन्होंने 20वीं सदी के मोड़ पर कलात्मक शैलियों और सामाजिक दृष्टिकोणों में होने वाले नाटकीय परिवर्तनों को न केवल देखा बल्कि उन्हें आकार भी दिया। सिकर्ट के काम को आसानी से किसी एक श्रेणी में नहीं बांधा जास्त सकता; उन्होंने सरल लेबल का विरोध किया और जानबूझकर प्रभाववाद (Impressionism), प्रतीकवाद (Symbolism) और यथार्थवाद की एक विशिष्ट व्यक्तिगत शैली के बीच की रेखाओं को धुंधला कर दिया, जिसने लंदन की सड़कों और वहां के निवासियों की कठोर सुंदरता को जीवंत कर दिया।

प्रारंभिक जीवन और प्रभाव – एक यूरोपीय शिक्षा

सिकर्ट का प्रारंभिक जीवन निरंतर भ्रमण और कुछ हद तक अपरंपरागत शिक्षा से चिह्नित था। जर्मनी में एक कलाकार पिता की संतान होने के नाते, उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्ष यूरोप के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करते हुए बिताए, जहाँ उन्होंने पेरिस, ब्रुसेल्स और म्यूनिख की कलात्मक लहरों को आत्मसात किया। इस वैश्विक परवरिश ने उनके भीतर विविध शैलियों और तकनीकों के प्रति गहरी प्रशंसा पैदा की – बेल्जियम के उस्तादों के सूक्ष्म यथार्थवाद से लेकर प्रभाववाद के जीवंत रंग पैलेट तक। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने लंदन के रॉयल एकेडमी में अध्ययन किया, जिससे उन्हें पारंपरिक पेंटिंग विधियों की बुनियादी समझ प्राप्त हुई, हालांकि उन्होंने जल्द ही इन परंपराओं से परे जाने का प्रयास किया। गुस्ताव मोरो जैसे कलाकारों के कार्यों के संपर्क ने, उनकी प्रतीकात्मक छवियों और मानवीय अनुभवों के गहरे पहलुओं में रुचि के साथ, उनके कलात्मक दृष्टिकोण को गहराई से आकार दिया। जापानी प्रिंट्स का प्रभाव – विशेष रूप से उनका सपाट परिप्रेक्ष्य और विवरणों पर जोर – भी उनके संपूर्ण कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

कैम्डेन टाउन ग्रुप और एक लंदन सौंदर्यशास्त्र

1893 में, सिकर्ट बढ़ते हुए 'कैम्डेन टाउन ग्रुप' में शामिल हो गए, जो कलाकारों का एक ऐसा समूह था जो लंदन के ईस्ट एंड की आत्मा को पकड़ने का प्रयास कर रहा था—एक ऐसा क्षेत्र जो अपनी गरीबी, भीड़भाड़ और जीवंत नाइटलाइफ़ के लिए जाना जाता था। इस समूह ने, जिसमें वॉल्टर डी ला मारे, विलियम लिटन ऑसबोर्न और जॉन सिंगर सार्जेंट (हालांकि वे कुछ हद तक अलग रहे) शामिल थे, प्रचलित अकादमिक मानकों को त्याग दिया और शहरी जीवन के एक अधिक प्रत्यक्ष और अक्सर निर्भीक चित्रण को अपनाया। इस काल की सिकर्ट की पेंटिंग्स – जैसे कि Brighton Pierrots (1890) और The Finishers (1892) – अपने ढीले ब्रशवर्क, नाटकीय प्रकाश व्यवस्था और लंदन के श्रमिक वर्ग के हाशिए पर रहने वाले पात्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी रुचि गरीबी का रूमानीकरण करने में नहीं थी; इसके बजाय, उन्होंने इसे एक ऐसे कठोर यथार्थवाद के साथ प्रस्तुत किया जिसने इसकी कठिनाइयों और इसकी अंतर्निहित गरिमा दोनों को प्रकट किया। प्रेरणा के स्रोत के रूप में फोटोग्राफी का उनका उपयोग—अक्सर सीधे प्रेस फोटोग्राफ की नकल करना—उनके अभ्यास का एक विवादास्पद लेकिन महत्वपूर्ण पहलू था, जिसने कलात्मक मौलिकता की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी।

तकनीक और विषय वस्तु: छाया और चित्र

सिकर्ट की तकनीक उनके पूरे करियर के दौरान काफी विकसित हुई। प्रारंभ में प्रभाववाद से प्रभावित होकर, उन्होंने धीरे-धीरे एक अधिक सुविचारित और नियंत्रित दृष्टिकोण विकसित किया, जिसमें वायुमंडलीय प्रभाव पैदा करने के लिए टूटे हुए ब्रशस्ट्रोक और रंगों के सूक्ष्म स्तरों का उपयोग किया गया। वे शहरी जीवन के क्षणभंगुर क्षणों को पकड़ने में विशेष रूप से कुशल थे – जैसे एक भीड़भाड़ वाला पब दृश्य, सड़क के कोने पर बातचीत, या विचारों में खोया हुआ एक अकेला व्यक्ति। उनके चित्र (Portraits) भी उतने ही सम्मोहक हैं, जो अक्सर अपने विषयों के व्यक्तित्व और आंतरिक जीवन की गहरी समझ को प्रकट करते हैं। उन कई चित्रकारों के विपरीत जो अपने मॉडलों का आदर्श रूप प्रस्तुत करने की कोशिश करते थे, सिकर्ट ने अक्सर व्यक्तियों को पूरी ईमानदारी के साथ चित्रित किया, उनकी झुर्रियों, खामियों और कमजोरियों को कैद किया। वे प्रकाश और छाया के खेल से मंत्रमुग्ध थे, और अंधकार का उपयोग केवल एक संरचनात्मक तत्व के रूप में ही नहीं, बल्कि मनोदशा और मनोवैज्ञानिक गहराई का सुझाव देने के साधन के रूप में भी करते थे।

विरासत और ऐतिहासिक महत्व

ब्रिटिश कला में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, सिकर्ट की विरासत कुछ हद तक विवादों की छाया में रही है। जैक द रिपर हत्याकांड से उन्हें जोड़ने वाली निरंतर अफवाहों ने—जो 1888 की शरद ऋतु के दौरान उनकी लंदन गतिविधियों के बारे में अटकलों से प्रेरित थीं—लंबे समय तक उनकी प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को काफी हद तक निराधार मानकर खारिज कर दिया गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सिकर्ट का प्रभाव किसी एक सनसनीखेज कहानी से कहीं आगे तक फैला हुआ है। उन्होंने ब्रिटिश आधुनिकतावाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पॉल नैश और क्रिस्टोफर रिचर्ड विने टर्नर (टर्नर) जैसे कलाकारों के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ। नई तकनीकों के साथ प्रयोग करने की उनकी इच्छा, शहरी जीवन में उनकी रुचि, और लंदन के निचले स्तर की वास्तविकताओं को चित्रित करने की उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें कला के इतिहास में एक वास्तव में मौलिक और स्थायी व्यक्तित्व बना दिया। उनका कार्य आज भी अपने विचारोत्तेजक वातावरण, मनोवैज्ञानिक गहराई और आधुनिक दुनिया के अद्वितीय दृष्टिकोण के लिए अध्ययन और सराहना का पात्र बना हुआ है।

मुख्य तथ्य

  • Artistic Movement Or Style: ब्रिटिश प्रभाववाद
  • Artists Or Movements Influenced By This Artist: ['उत्तर-प्रभाववाद']
  • Artists Who Influenced This Artist: ['प्रभाववादी']
  • Date Of Birth: 31 मई, 1860
  • Date Of Death: 22 जनवरी, 1942
  • Full Name: वॉल्टर रिचर्ड सिकर्ट
  • Nationality: ब्रिटिश
  • Notable Artworks:
    • ब्राइटन पिएरोट्स
    • लंदन ग्रुप
    • कैमडेन टाउन ग्रुप
  • Place Of Birth: बर्लिन, जर्मनी