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कैमिल्ले पिसारो के इस उत्कृष्ट चित्र में ग्रामीण जीवन का शांत चित्रण है। इस कलाकृति को 1893 में इम्प्रेसिओनिस्ट शैली में बनाया गया था और यह कला इतिहास का एक अनमोल टुकड़ा है।

कैमिल पिसारो एक फ्रांसीसी प्रभाववादी और नव-प्रभाववादी चित्रकार थे। उन्होंने ग्रामीण दृश्य और शहरी जीवन के सुंदर चित्रों से आधुनिक कला को आकार दिया। पिसारो ने कई कलाकारों को प्रेरित किया और प्रभाववाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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प्रमुख विशेषताएँ

  • Location: Musée des Beaux-Arts André Malraux, Le Havre
  • Notable elements or techniques: Soft brushstrokes; Vivid hues
  • Dimensions: 65 x 53 cm
  • Medium: Oil on canvas
  • Subject or theme: Rural life; Domestic tranquility
  • Year: 1893
  • Title: Peasant Woman and Child, Eragny

कैमिल्ले पिसारो के चित्रकला कृति: पेasant Woman और Child, Eragny

कैमिल्ले पिसारो एक डच-फ्रांसीसी चित्रकार थे जिन्होंने कलात्मक इतिहास में अपनी छाप छोड़ी। उनका जन्म 10 जुलाई 1830 को स्ट. थॉमस द्वीप पर हुआ था, जो तब डेनमार्क के अधीन था और अब संयुक्त राज्य अमेरिका का एक क्षेत्र है। उनके पिता एक पुर्तगाली यहूदी व्यापारी थे जिनके फ्रांसीसी नागरिकता के साथ संबंध थे और उनकी मां एक फ्रांसीसी यहूदी परिवार से थीं। इस परवरिश ने उन्हें दुनिया के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में मदद की जो बाद में उनकी कलात्मक अभ्यास को आकार देगी। सвары अकादमी में उनका प्रारंभिक औपचारिक प्रशिक्षण पेरिस में पारंपरिक तकनीकों पर आधारित था, लेकिन स्ट. थॉमस लौटने के बाद उन्होंने कलात्मक दृष्टि को परिभाषित करने वाले दृश्यों को इतनी समर्पितता से चित्रित किया। पिसारो का शुरुआती जीवन और कलात्मक विकास एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं जो उन्हें अपने कलात्मक अभ्यास के लिए प्रेरित करती है। सвары अकादमी में उनका प्रशिक्षण उन्हें यूरोपीय चित्रकला के बुनियादी सिद्धांतों से परिचित कराता है, जबकि स्ट. थॉमस द्वीप पर उनके बचपन ने उन्हें प्रकृति और ग्रामीण जीवन के प्रति गहरी सराहना विकसित करने में मदद की। यह प्रेरणा पिसारो के चित्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ वे अक्सर शांत और सुंदर दृश्यों को चित्रित करते हैं जो दर्शकों को एक सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। ### चित्रकला शैली और तकनीक: प्रभाववाद का उदय कैमिल्ले पिसारो को व्यापक रूप से प्रभाववाद के जनक माना जाता है, एक कलात्मक आंदोलन जिसने 19वीं शताब्दी के अंत में यूरोपीय कला पर गहरा प्रभाव डाला। प्रभाववाद कलाकारों को प्राकृतिक प्रकाश और रंग के उपयोग पर जोर देता है ताकि दृश्य अनुभव को जीवंत किया जा सके और भावनाओं को व्यक्त किया जा सके। पिसारो ने इस शैली को अपने चित्रों में सफलतापूर्वक एकीकृत किया, जिसमें वे अक्सर बाहरी वातावरणों को चित्रित करते हैं और रंगों का उपयोग सूक्ष्मता से करते हैं ताकि एक विशेष मूड या भावना पैदा हो सके। उनके ब्रशवर्क हल्के और वायुमंडलीय होते हैं, जो चित्रकला के काम को एक अद्वितीय गतिशीलता और जीवंतता प्रदान करते हैं। पिसारो के चित्रों में प्रभाववाद के तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जैसे कि नरम ब्रशस्ट्रोक और चमकीले रंग जो दृश्य अनुभव को जीवंत करते हैं। वे कलाकारों को प्राकृतिक प्रकाश के प्रभावों का उपयोग करने और रंगों को सूक्ष्मता से मिलाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि एक विशेष मूड या भावना पैदा हो सके। पिसारो ने इस तकनीक को अपने चित्रों में कुशलता से इस्तेमाल किया है, जिसमें वे अक्सर शांत और सुंदर दृश्यों को चित्रित करते हैं जो दर्शकों को एक सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। उनके काम में गतिशीलता और जीवंतता का एहसास होता है जो प्रभाववाद के मूल सिद्धांतों को दर्शाता है। ### ऐतिहासिक संदर्भ और प्रतीकवाद: ग्रामीण जीवन का चित्रण कैमिल्ले पिसारो के चित्रकला कार्य फ्रांसीसी इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर से जुड़े हुए हैं, जब प्रभाववाद कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक नई दिशा प्रदान कर रहा था। उनके चित्रों में अक्सर ग्रामीण जीवन के दृश्य होते हैं जो उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाते हैं। पिसारो ने इन दृश्यों को चित्रित करते समय विशेष ध्यान दिया कि वे दर्शकों को क्या महसूस कराते हैं और उन्हें किस प्रकार से प्रेरित करते हैं। उनका कलात्मक उद्देश्य एक सुंदर और सार्थक छवि बनाना था जो समाज में जीवन के अनुभवों को प्रतिबिंबित करे। पिसारो के चित्रों में प्रतीकवाद का उपयोग भी किया जाता है, जहाँ वस्तुओं या दृश्यों का उपयोग विशिष्ट अर्थों या विचारों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, उनके चित्रों में अक्सर बच्चे और परिवार के सदस्य होते हैं जो प्रेम और सुरक्षा के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिसारो ने इन प्रतीकों का उपयोग अपने कलात्मक संदेश को मजबूत करने के लिए किया है और दर्शकों को एक गहरा भावनात्मक अनुभव प्रदान करने की कोशिश की है। उनका काम कलात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है जब प्रभाववाद कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक नई दिशा प्रदान कर रहा था। ### भावनात्मक प्रभाव: शांति और सुंदरता का अनुभव कैमिल्ले पिसारो के चित्रकला कार्य दर्शकों पर एक गहरा भावनात्मक प्रभाव डालते हैं जो शांति और सुंदरता की भावना पैदा करते हैं। उनके चित्रों में रंगों का उपयोग सूक्ष्मता से किया जाता है ताकि एक विशेष मूड या भावना पैदा हो सके और दर्शक अपने आसपास के वातावरण को महसूस कर सकें। पिसारो ने इस तकनीक को अपने चित्रों में कुशलता से इस्तेमाल किया है, जिसमें वे अक्सर शांत और सुंदर दृश्यों को चित्रित करते हैं जो दर्शकों को एक सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। उनका काम कलात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है जब प्रभाववाद कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक नई दिशा प्रदान कर रहा था।

कलाकार का जीवन परिचय

कैमिल पिसारो: प्रभाववाद के पिता और ग्रामीण जीवन के चित्रकार

कैमिल पिसारो, जिनका जन्म 10 जुलाई, 1830 को सेंट थॉमस द्वीप पर हुआ था, एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने न केवल प्रभाववादी कला आंदोलन को आकार दिया बल्कि बाद की पीढ़ियों के कलाकारों को भी प्रेरित किया। उनका जीवन और कला, दोनों ही बदलते परिदृश्य का प्रतिबिंब थे - चाहे वह कैरिबियाई द्वीप पर उनका प्रारंभिक बचपन हो या बाद में फ्रांस में उनके द्वारा चित्रित ग्रामीण दृश्य। पिसारो का परिवार पुर्तगाली यहूदी मूल का था, लेकिन उन्होंने फ्रांसीसी संस्कृति को भी अपनाया, जिससे उनके व्यक्तित्व और कला में एक अनूठी जटिलता पैदा हुई। सेंट थॉमस के बंदरगाहों और बाजारों की जीवंत यादें, बाद में उनके चित्रों में ग्रामीण जीवन की शांतिपूर्ण छवियों के साथ मिलकर, उनकी कलात्मक दृष्टि को गहराई से प्रभावित करती हैं। शुरुआती वर्षों में, पिसारो ने पारंपरिक व्यापार में शामिल होने का दबाव महसूस किया, लेकिन कला के प्रति उनका जुनून इतना प्रबल था कि उन्होंने इसे अपना करियर बना लिया। डेनिश चित्रकार फ्रिट्ज़ मेलबी के मार्गदर्शन में, उन्होंने अपनी कलात्मक यात्रा शुरू की और जल्द ही पेरिस चले गए, जहाँ उन्होंने यूरोपीय कला जगत के केंद्र में प्रवेश किया।

प्रभाववाद का उदय: तकनीक और दर्शन

पेरिस में, पिसारो ने गुस्ताव कोर्बेट और ऑनरे डोमियर जैसे कलाकारों से प्रेरणा ली, जिन्होंने यथार्थवादी चित्रण पर जोर दिया था। लेकिन जल्द ही उन्होंने प्रभाववादी आंदोलन के साथ जुड़ने का फैसला किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी विचार था। प्रभाववाद का सार प्रकाश और वायुमंडल की क्षणिक विशेषताओं को पकड़ना था - यह एक ऐसी तकनीक जिसके लिए कलाकारों को सीधे प्रकृति में, खुले मैदानों में चित्र बनाना पड़ता था। पिसारो ने इस दृष्टिकोण को पूरी तरह से अपनाया, अपने ब्रशस्ट्रोक को ढीला किया और रंगों को जीवंत बनाया। उन्होंने ग्रामीण इलाकों के दृश्यों को चित्रित करने पर विशेष ध्यान दिया - खेतों में काम करते किसान, शांत गांव, और पेड़ों से भरे रास्ते। उनके चित्रों में एक विशिष्ट शांति और सादगी है, जो उस समय की शहरी जीवनशैली से अलग थी। पिसारो ने न केवल दृश्य वास्तविकता को चित्रित किया, बल्कि ग्रामीण जीवन के भावनात्मक सार को भी व्यक्त करने का प्रयास किया - किसानों की मेहनत, प्रकृति की सुंदरता, और साधारण लोगों की खुशियाँ और दुःख। उन्होंने अपने चित्रों में अक्सर धुंधले रंगों का उपयोग किया, जिससे एक स्वप्निल और रहस्यमय वातावरण बनता था। यह तकनीक उन्हें प्रकाश और वायुमंडल के सूक्ष्म प्रभावों को पकड़ने में मदद करती थी, जो प्रभाववादी कला की विशेषता है।

एक मार्गदर्शक शक्ति: कलाकारों पर पिसारो का प्रभाव

कैमिल पिसारो न केवल एक कुशल कलाकार थे, बल्कि वे अपने साथियों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी थे। उन्हें अक्सर "प्रभाववाद के पिता" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने इस आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कई युवा कलाकारों का समर्थन किया, जिनमें पॉल सेज़ान, विन्सेंट वैन गॉग और पॉल गौगिन शामिल हैं। सेज़ान ने पिसारो को अपना गुरु माना और उनसे कलात्मक मार्गदर्शन प्राप्त किया। वैन गॉग और गौगिन भी पिसारो की सलाह और प्रोत्साहन से लाभान्वित हुए। पिसारो ने उन्हें न केवल तकनीकी कौशल सिखाया, बल्कि कला के प्रति एक स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कलाकारों को पारंपरिक मानदंडों को चुनौती देने और अपनी अनूठी आवाज खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। पिसारो का प्रभाव उनके चित्रों में भी स्पष्ट है - उनकी ग्रामीण दृश्य शैली ने कई अन्य कलाकारों को प्रभावित किया, जिन्होंने प्रकृति की सुंदरता को चित्रित करने के लिए नई तकनीकों का प्रयोग किया।

विरासत: कला इतिहास पर एक अमिट छाप

कैमिल पिसारो 13 नवंबर, 1903 को पेरिस में अपनी मृत्यु तक चित्रकला करते रहे। उनकी विरासत आज भी जीवित है - उनके चित्रों को दुनिया भर के प्रमुख संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जाता है और वे कला प्रेमियों द्वारा सराहे जाते हैं। पिसारो ने प्रभाववादी आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उन्होंने ग्रामीण जीवन की सुंदरता को चित्रित करने के लिए एक अनूठी शैली विकसित की। उनकी कला ने न केवल दृश्य वास्तविकता को दर्शाया, बल्कि मानवीय भावनाओं और सामाजिक मुद्दों को भी व्यक्त किया। पिसारो का काम आज भी कलाकारों को प्रेरित करता है और हमें प्रकृति की सुंदरता और साधारण लोगों के जीवन की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। उनकी कला एक कालातीत संदेश देती है - कि सौंदर्य हर जगह मौजूद है, बस उसे देखने की जरूरत है।

पिसारो की कुछ प्रमुख कृतियाँ

  • द टर्नर रोड, पिलटन (The Turner Road, Pilton): यह चित्र ग्रामीण इंग्लैंड के एक शांत दृश्य को दर्शाता है और पिसारो की ग्रामीण जीवन के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
  • ऑटम इन द वौइसिन (Autumn in the Voisen): इस पेंटिंग में शरद ऋतु के रंगों का उपयोग किया गया है, जो एक शांत और उदास वातावरण बनाता है।
  • द चर्च एट वर्तिएल (The Church at Vertiel): यह पिसारो की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है, जिसमें एक छोटे से गांव में स्थित चर्च को दर्शाया गया है।
  • मॉर्निंग मिस्ट, एर्गेन्ट्यू (Morning Mist, Argentueil): इस पेंटिंग में धुंधले वातावरण का चित्रण किया गया है, जो पिसारो की प्रकाश और वायुमंडल के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कैमिल पिसारो

कैमिल पिसारो

1830 - 1903 , फ्रांस

मुख्य तथ्य

  • कलात्मक शैली: प्रभाववाद, नव-प्रभाववाद
  • जन्म तिथि: 10 जुलाई 1830
  • जन्म स्थान: शार्लोट एमेलिया, सेंट थॉमस
  • पूरा नाम: कैमिल पिसारो
  • प्रभावित आंदोलन:
    • सेज़ान
    • वैन गॉग
    • गौगिन
  • प्रभावित कलाकार:
    • गुस्ताव कोरबेट
    • जीन-बैप्टिस्ट
  • मृत्यु तिथि: 13 नवंबर 1903
  • राष्ट्रीयता: डैनिश-फ्रांसीसी
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